धुंधलका है आसमान में
ना बादल है
न ही घटा कोई
फिर क्यूँ तारे नहीं आज
क्यूँ इस आसमान का
आँगन सूना है
कोई मेहमान क्यूँ नहीं आया
आज
जिद्दी बच्चा खेल रहा है
आँगन में
अकेला ही
बेहद चमकीले पैराहन में
गुरूर में है चाँद आज