सूना सा ये घर
ना साथी है,
ना ही दोस्त कोई
गोल चेहरे वाला
ये गोरा सा मासूम बच्चा
सारी रात
अकेला ही खेल करता है
सूने से इस घर में
फलक की खिड़कियों के
दरवाज़ों के
पर्दों के आगे पीछे
लुका-छिपी में मशगूल
रहता है रात भर
आखिर बादल थक जाते हैं
ये भी नींद से बोझिल
बाबा के जागने से पहले
सो जाएगा
सूरज निकलने वाला है
कुछ देर में
ना साथी है,
ना ही दोस्त कोई
गोल चेहरे वाला
ये गोरा सा मासूम बच्चा
सारी रात
अकेला ही खेल करता है
सूने से इस घर में
फलक की खिड़कियों के
दरवाज़ों के
पर्दों के आगे पीछे
लुका-छिपी में मशगूल
रहता है रात भर
आखिर बादल थक जाते हैं
ये भी नींद से बोझिल
बाबा के जागने से पहले
सो जाएगा
सूरज निकलने वाला है
कुछ देर में